Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: let’s promise to work towards the betterment of our country daily!

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: let’s promise to work towards the betterment of our country daily!

PM मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा होलोग्राम स्टैच्यू का अनावरण किया, शाह बोले- यह करोड़ों लोगों के भाव की अभिव्यक्ति

subhash chandra bose jayanti: Netaji Birthday సాయుధ పోరాటంతో బ్రిటిషర్లను వణికించిన మరో శివాజీ.. మన నేతాజీ - freedom fighter subhash chandra bose birth anniversary interesting things must know about ...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण कर दिया है। इस दौरान उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में अमित शाह ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को पराक्रम, देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगी। यह करोड़ों लोगों के भाव की अभिव्यक्ति होगी।

वहीं PM मोदी ने कहा कि यह कालखंड ऐतिहासिक है। यह स्थान जहां हम मौजूद हैं, यह भी ऐतिहासिक है। आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं। नेताजी की भव्य प्रतिमा डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट पर स्थापित हो रही है। जल्द ही इसकी जगह ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा लगेगी। यह प्रतिमा आजादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है।

अपने पिता को याद करते हुए डॉ. अनीता बोस फैफ कहती हैं,

‘देश के लिए अगाध प्रेम से भरे थे मेरे पिता’

अपने पिता को याद करते हुए डॉ. अनीता बोस फैफ कहती हैं, ‘124 साल पहले, भारत के महान सपूतों में से एक मेरे पिता नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक में हुआ था। केंद्र और राज्य सरकारों ने उनकी 125वीं जयंती पर उन्‍हें सम्‍मानित करने का जो फैसला किया है, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।’ सुभाषचंद्र के सपनों के भारत के बारे में अनीता बोस कहती हैं, ‘उन्होंने एक ऐसे देश की कल्पना की थी, जो आधुनिक, प्रबुद्ध और अपने ऐतिहासिक, दार्शनिक व धार्मिक परंपराओं की जड़ों से गहराई से जुड़ा हो।’

आजादी को लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जज्‍बे को सैल्‍यूट करते हुए डॉ. अनीता बोस कहती हैं, ‘अपने देश के लिए अथाह प्रेम की भावना उनमें कुछ इस तरह थी कि परिवार और मित्रों के लिए उनकी जिम्‍मेदारी हो या यहां तक कि अपनी सुरक्षा, सबकुछ उसके आगे फीका पड़ जाता था या कहें कि देशप्रेम की उस भावना में यह सब कहीं दब जाता था। देश की आजादी के लिए उन्‍होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की।’ बकौल डॉ. अनीता बोस, उनके पिता इस बात से भलीभांति परिचित थे कि आजाद भारत की अपनी अलग चुनौतियां होंगी और भी इनका सामना करने के लिए तैयार थे, पर दुर्भाग्‍यवश ऐसा हो न सका।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *