Rajasthan BJP: भाजपा का ‘नॉट रिचेबल’ चिंतन शिविर, दूर-दूर तक जहां मोबाइल सिग्नल नहीं, वहां 2 दिन क्या हुआ?

राजस्थान


हाइलाइट्स

  • राजसमंद के कुंभलगढ़ में बीजेपी का दो दिवसीय चिंतन शिविर।
  • चाक-चौबंद व्यवस्था ,चिंतन ऐसी जगह , जहां 8 से 10 किमी तक मोबाइल नेटवर्क नहीं
  • इस चिंतन शिविर से मीडिया और आमजन को भी दूर रखा गया

जयपुर/राजसमंद
राजस्थान में प्रदेश भाजपा की दो दिवसीय चिंतन बैठक बुधवार को सम्पन्न हुई। राजसमंद के कुंभलगढ़ में आयोजित इस बैठक में क्या कुछ हुआ? किन मुद्दों पर बहस या चिंतन हुआ? शिविर में शामिल नेताओं और संगठन पदाधिकारियों के अतिरिक्त किसी को बहुत ज्यादा मालुमात नहीं हुई। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने इस चिंतन शिविर को संगठन की सामान्य गतिविधि बताया। लेकिन प्रदेश के सियासी गलियारों में पार्टी की चिंता की वजह बनी आपसी खींचतान और भावी उपचुनाव को लेकर चिंता ही इस बैठक का मूल मकसद बताया जा रहा है। शायद यही वजह रही की पार्टी ने शिविर के लिए ऐसी जगह चुनी जहां अधिकांश मोबाइल ‘नॉट रिचेबल’ ही रहे। ऐसे में राजनीतिक हलकों में बातें सामने आने में अभी कुछ और समय लग सकता है।

8-10 किलाेमीटर तक नेटवर्क नहीं, एकांत में हुआ चिंतन
बीजेपी का यह चिंतन शिविर अरावली की पहाड़ियों के बीच कुंभलगढ़ के एवरेस्ट हिल होटल में लगा। ये वो इलाका है जहां 8-10 किलोमीटर तक अधिकांश मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क न के बराबर रहता है। पार्टी सूत्रों की मानें तो चिंतन शिविर के लिए इस जगह के चुनाव के पीछे की एक वजह यह भी रही। ताकि न मोबाइल की घंटियां बजी और न नेताओं का ध्यान भटका। और दूसरी बात करते तो, चिंतन में हुए मंथन का किसी को पता भी नहीं चला!
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मीडिया से दूरी, पूनियां भी बयानों में बचते दिखे
इस बैठक को लेकर सियासी हलकों में काफी चर्चाएं चल रही है। वहीं विपक्ष और आमजन ने भी इस पर कई सवाल खड़े किए हैं। इस बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने इसे सामान्य बैठक और आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर बताया है। जबकि बैठक के मूल मुद्दे को सभी बड़े नेताओं ने गोल कर दिया। उपचुनाव से पूर्व हुई इस तरह की महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह और गजेंद्र सिंह की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।
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जिला स्तरीय पदाधिकारी ही नहीं होटल के वेटर तक को एंट्री नहीं मिली
अरावती के पहाड़ों में ऐसी एकांत जगह पर चिंतन की वजह कुछ भी हो लेकिन गोपनीयता भी खास रखी गई। जिला स्तरीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ मीडिया कर्मियों को भी दूर रखा गया। सूत्रों की मानें तो होटल में काम करने वाले वेटर को भी बैठक के दौरान अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

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