पंजाब के बाद खुली राजस्थान की राह! कैबिनेट विस्तार का काउंटडाउन शुरू, आज महासचिव वेणुगोपाल भी पहुंचेंगे जयपुर

राजस्थान


हाइलाइट्स

  • राजस्थान कांग्रेस का सियासी घमासान जल्द हो सकता है खत्म
  • राजस्थान में मंत्रिमण्डल विस्तार इसी सप्ताह पूरा होने की संभावना
  • कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में जल्द ही खत्म करना चाहती है राजनीतिक घमासान

जयपुर
पंजाब के मसले के समाधान के बाद अब कांग्रेस आलाकमान का फोकस राजस्थान की ओर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने अजय माकन (Ajay Maken) को दिशा निर्देश दिए दिए हैं कि वो जल्द ही राजस्थान में चल रहे सियासी मुद्दों का हल निकालकर पार्टी को एकजुट करने की ओर कदम बढ़ाएं, ताकि मंत्रिमण्डल विस्तार हो सके। पता चला है कि इसी सप्ताह तक प्रदेश में मंत्रिमण्डल में फेरबदल और विस्तार हो सकता है। इसी क्रम में आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर पहुंचकर चर्चा करेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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पायलट के साथ हो चुका है मंथन, अंतिम चर्चा गहलोत से
मिली जानकारी के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार के लिए एक बार पायलट से मंथन हो चुका है। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि आलाकमान की ओर से पायलट गहलोत कैंप में सुलह का जो फार्मूला तैयार किया गया था उस पर सहमति बन गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों इस फार्मूले पर सहमत है। सूत्रों की माने तो मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट खेमे के चार से पांच विधायकों को जगह मिल सकती है। वहीं सचिन पायलटऔर हेमाराम ने क्योंकि मंत्रिमण्डल में शामिल होने से मना कर दिया है, लिहाजा उन्हें पार्टी अब नए पद की जिम्मेदारी दे सकती है।

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गहलोत के ट्वीट में दिखी थी नरमी
उल्लेखनीय है कि हाल ही पंजाब कांग्रेस में बनी सहमति के बाद सीएम गहलोत ने एक ट्वीट कर जहां नवजोत सिंह सिद्धु को बधाई दी थी। वहीं इस ट्वीट के जरिए उन्होंने कांग्रेस की परम्परा का हवाला देते हुए राय-मशविरा के साथ सोनिया गांधी के हर फैसले को मानने की बात कही थी। बीते सोमवार को किया गया गहलोत का ट्वीट काफी चर्चा में रहा, तभी से माना जा रहा है कि गहलोत अब पार्टी आलाकमान की बात मानते हुए मंत्रिमण्डल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के लिए तैयार है। गौरतलब है कि राजस्थान में गहलोत सरकार का अब लगभग आधे से भी ज्यादा कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन मंत्रिमण्डल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां ना होने से कार्यकर्ता परेशान है। लिहाजा वे लगातार इसकी मांग करते आ रहे हैं।

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