किसानों का नया पैतरा ,दी सरकार को चुनौती ,शाहजहांपुर बॉर्डर पर रातोंरात बना दिया शहीद स्मारक

राजस्थान


हाइलाइट्स:

  • शाहजहांपुर बॉर्डर आंदोलनकारी किसानों ने बनाया शहीद स्मारक
  • किसान नेताओं ने दिन में अनुमति लेकर शहीद स्मारक बनाने का DM को दिया आश्वासन
  • लेकिन रात में बिना अनुमति हाइवे पर अतिक्रमण कर बनाया पक्का शहीद स्मारक
  • सरकार को दी चुनौती,दम है तो हटा दे शहीद स्मारक को
  • पुलिस और प्रशासन बना रहा मूक दर्शक

अलवर

देश में जहां किसान आंदोलन बदस्तूर जारी है। वहीं शाहजहांपुर बॉर्डर पर सरकार को चुनौती देने के लिए आंदोलनकारी किसानों ने नया पैतरा अपनाया है। राजस्थान के अलवर जिले के शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले शहीदों को नमन करते हुए नेशनल हाइवे- 48 पर देर रात बिना अनुमति के बीच हाइवे पर शहीद स्मारक बना दिया है। बताया जा रहा है कि डीएम को इस संबंध में दिन में किसान नेताओं ने जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार से अनुमति लेकर शहीद स्मारक बनायेगे , लेकिन रात में बिना अनुमति के ही शहीद स्मारक बना दिया गया। इसमें देशभर के राज्यों से आई मिट्टी के कलशों की मिट्टी डाली गई है। आपको बता दें कि सोमवार को शाहजहांपुर बॉर्डर पर स्वराज्य पार्टी के नेता योगेंद्र यादव, मेघा पाटेकर ,पूनम पंडित सहित बड़ी संख्या में किसान आंदोलन से जुड़े नेता मौजूद है। सभी ने यहां आज शहीदों को श्रद्धांजली अर्पित की है।

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किसान नेता बोले- हिम्मत है, तो सरकार हटाकर दिखाए शहीद स्मारक
आपको बता दें कि शाहजहांपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसान नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध जता रहे हैं। बीते दिनों अचानक देश की विभिन्न शहरों से घड़ों में मिट्टी अलवर पहुंची। इसके बाद रविवार रात किसानों ने शाहजहांपुर बॉर्डर पर हाईवे के बीचों बीच डिवाइडर पर शहीद स्मारक बना दिया। स्मारक बनाने के बाद किसान नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन पर सरकार से पूछ कर नहीं बैठे थे। हमने शहीद स्मारक बना दिया है। सरकार की हिम्मत हो तो शहीद स्मारक को हटा देगी।

प्रमुख किसान नेताओं की कलेक्टर से नहीं हो पाई थी बात
उल्लेखनीय है कि रविवार दोपहर अलवर जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया शाहजहांपुर में चल रहे किसान पड़ाव में पहुंचे थे। तब एक प्रमुख किसान नेता को कोरोना होने एवं पूर्व विधायक अमराराम चौधरी के बाहर होने से उनकी प्रमुख नेताओं से बात नहीं हो पाई। तब भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने बिना अनुमति के शहीद स्मारक नही बनाने का आश्वासन दिया था।लेकिन रविवार देर रात किसानों ने बॉर्डर पर हाईवे के बीच बने डिवाइडर के ऊपर मिट्टी का शहीद स्मारक बना दिया।

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हर शहीद किसान की स्मृति में एक मटकी
दिलचस्प बात यह है कि आंदोलन स्थल पर पुलिस फोर्स तैनात है ,जो 24 घण्टे ड्यूटी और अस्थाई चौकी के रूप में रहते है। लेकिन उन्होंने भी उन्हें रोकना उचित नहीं समझा। शहीद स्मारक निर्माण के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी करीब एक किमी आगे चैक पोस्ट पर कोविड की नो-एंट्री की पालना में जुटे थे। प्रशासन का ध्यान हटते ही किसानों ने हाईवे के बीच डिवाइडर पर ईंटों की चिनाई कर स्मारक खड़ा कर दिया। | आंदोलनकारी किसान मोर्चे के नेताओं का कहना है कि स्मारक पर आंदोलन में शहीद हुए हर एक किसान की स्मृति में एक मटकी लगाई गई है।। सोमवार को शहीद स्मारक विधिवत उदघाटन किया गया है। इसमें योगेंद्र यादव सहित सभी बड़े नेता मौजूद रहे।

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