राजस्थान बीजेपी में ‘लेटर बम’ ने पकड़ा तूल, सदन में बोलने का मौका नहीं मिलने की बात को लेकर अब राजे – राठौड़ गुट आमने- सामने

राजस्थान


जयपुर
राजस्थान बीजेपी में गुटबाजी की खाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। ताजा मामला यह है कि अब वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों ने अब सीधे नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ पर सदन में उन्हें बोलने का अवसर ना देने का आरोप लगा दिया है। मीडिया रिपोटर्स की मानें, तो इस मामले में विधायकों ने प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, वसुंधरा राजे और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस संबंध मे पत्र लिखकर सूचित कर दिया है। इधर प्रदेश संगठन में बड़े नेताओं के बीच मनमुटाव की सुगबुगाहट से शीर्ष नेतृत्व भी अब चिंतित होता दिखाई दे रहा है। वहीं इस लेटर के शीर्ष और प्रदेश नेतृत्व के पास पहुंचने के बाद अब संगठन में खलबली मची हुई है। वहीं लेटर लिखने वाले विधायकों में शामिल बीजेपी के शीर्ष नेता अब अपनी सफाई देने में भी जुटे हैं।


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कैलाश मेघवाल ने दी सफाई- कहा मुझसे प्रताप सिंघवी ने करवाए थे हस्ताक्षर
आपको बता दें कि सदन में बोलने का अवसर ना मिलने की शिकायत करने वाले विधायकों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता औ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल भी शामिल है। लेकिन मामले को तूल पकडता देख अब उन्होंने इसे लेकर सफाई भी दे दी है। मेघवाल का कहना है कि इस लेटर में छबड़ा विधायक छबड़ा ने मुझसे हस्ताक्षर करवाए थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश मेघवाल का कहना है कि कुछ पुराने, अनुभवी और वरिष्ठ विधायकों की भावना थी कि विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने में उनकी उपेक्षा की जा रही है। उसी उपेक्षा के कारण उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक पत्र लिखा, जिस पर मैंने भी हस्ताक्षर किए।

क्यों घिरे कटारिया – राठौड़
आपको बता दें कि क्योंकि विधानसभा में विधायकों को बोलने का अवसर देने में नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक की अहम जिम्मेदारी होती है। ऐसे में विधायकों की ओर से सदन में ना बोलने का अधिकार मिलने की बात के मामले में उन्हें सीधे तौर पर घेरा जा रहा है। जानकारी यह भी है कि बीजेपी विधायकों की ओर से लिखे गए शिकायती पत्र में विधायकों ने सीधे नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ का नाम लिखा है। ऐसे में पार्टी अब विचारों के मामले में साफतौर पर अलग- अलग राह पर जाती दिखाई दे रही है। आपको बता दें कि वसुंधरा राजे की उपेक्षा का कारण पहले भी उपनेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ सवालों के घेरे में आ चुके हैं। वहीं ये दोनों नेता प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां के खास समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में वसुंधरा राजे समर्थक धड़े के निशाने पर रहते हैं।

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दूसरा खेमा भी अलर्ट मोड में , जवाब देने की तैयारी
आपको बता दें कि यह मुद्दा तब उठा है कि जब राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है। बताया जा रहा है कि शिकायती पत्र पहुंचने के बाद अब दूसरा गुट भी अलर्ट मोड में आ गया है। पत्र में जिन विधायकों के साइन है, उन सभी के नाम विधानसभा प्रोसेडिंग में खंगाले गए हैं। यह पता किया जा रहा है कि हाल ही राज्यपाल अभिभाषण के बाद कौन कितना बोला और पार्टी की सुबह- सुबह होने वाली मीटिंग में किस विधायक ने बोलने की इच्छा जताई।

सिंघवी ने दिया राजे का संदेश- कहा मैं किसी ने नाराज नहीं
आपको बता दें कि गुटबाजी की खबरों के बीच राजे के खास माने जाने वाले विधायक प्रताप सिंघवी ने राजे की ओर से बयान दिया है। सिंघवी ने कहा कि राजे ने संदेश दिया है कि वो पार्टी में किसी ने नाराज नहीं है, क्योंकि पार्टी ही मेरा परिवार है। हालांकि सीधे तौर पर राजे का बयान जारी ना होना अभी भी कई संशय पैदा कर रहा है। इधर राठौड़ ने सदन में बोलने का अवसर ना देने को लेकर बयान दिया है कि हमने तो बोलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया है।

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राजे की शक्ति प्रदर्शन को लेकर भी खलबली
उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे 8 मार्च को अपने जन्मदिन पर भरतपुर जिले से धार्मिक यात्रा कर रही हैं। इस धार्मिक यात्रा को भी शक्ति प्रदर्शन से जोड़ कर देखा जा रहा है। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं दूसरी ओर कोटा में वसुंधरा समर्थकों की ओर से उन्हें दोबारा सीएम फेस बनाने की मांग के बाद भी दूसरा गुट नाराज दिखाई दे रहा है। वहीं अब विधानसभा में बोलने का अवसर ना मिल पाने की शिकायत ने भी राजनैतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। लगातार बीजेपी में सामने आ रही ऐसी गतिविधियां राजनीति के पारे को बढ़ा रही है। फिलहाल देखना यह है कि कैसे बीजेपी आलाकमान इसका हल निकालता है।

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