NGT के नियमों की हो रही है अनदेखी , माउंटआबू के सौन्दर्य के साथ क्यों हो रहा खिलवाड़, जाने पूरा मामला

राजस्थान


माउंटआबू/सिरोही
प्रदेश में पर्यावरण को लेकर प्रदेश सरकार से लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट भले ही गम्भीर है । पर मानों सिरोही जिला प्रशासन पर्यावरण को नष्ट करने के लिए कोई कसर नही छोडना चाहता। हम बात हिल स्टेशन माउंट आबू की कर रहे हैं। दरअसल यहां अर्बुद की वादियों में लगातार ब्लास्टिंग कर जगहों को समतल करने का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रकृति के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को देकर प्रशासन से जुड़े अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद डालकर बच रहे हैं। वहीं लगातार हो रही ब्लास्टिंग से क्षेत्रवासी भी परेशान है। लोगों का कहना है कि यहां होने वाली ब्लास्टिंग के पीछे भ्रष्टाचार की परत साफ तौर पर दिखाई दे रही है। यही वजह है कि यहां नियमों की अनदेखी कर लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है। आपको बता दें कि इस मामले को लेकर चर्चा इसलिए भी अब ज्यादा हो रही है कि जहां यहां पूर्व में लोग घायल भी हो चुके है। वहीं हाल ही एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना भी मिली है।

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एक आदेश ने बना दी है असमंजस की स्थिति
दरअसल जानकारी यह मिली है कि दो साल पहले कन्ट्रोल व साईलेंट ब्लास्टिंग मामलें में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से ऊपर जाकर इसकी अनुमति दे दी थी।जिला कलेक्टर ने कन्ट्रोल व साईलेंट ब्लास्टिंग की कुछ शर्तो के आधार पर स्वीकृति जारी की थी। लेकिन दो साल बाद वर्तमान डीएफओ ने इसे स्थगित कर दिया। इस पूरे मामले में वर्तमान माउंट आबू डीएफओ काफी निवेदन के बाद कैमरे के सामने बोलने को तैयार हुए वो भी नपे तुले शब्दो में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा की माउंट आबू ब्लास्टिंग के मामले में सिर्फ जिला कलेक्टर साहब ही बोलेंगे। जब उन्हें उनके अधिकारों के बारे में पूछा तो बोले हमने कंट्रोल ब्लास्टिंग को स्थगित करने का जिला कलेक्टर को सुझाव दिया है। ऐसे में इस आदेश के बाद जहां असमंजस की स्थिति बनीं हुई है। वहीं प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के जिम्मेदारों का सही जवाब नहीं मिल रहा है।

पहले की आनाकानी, फिर कबूला ब्लास्टिंग
इधर माउंट आबू नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी रामकिशोर ने पहले तो एक महिने पहले पदस्थापित होने का हवाला देते हुए कहा है कि एक महिने में किसी प्रकार की कोई ब्लास्टिंग नहीं हुई । मगर उन्होंने ही कुछ ही पल में ब्लास्टिंग से एक व्यक्ति के घायल होने की बात स्वीकार ली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रसूखदारों के आगे प्रशासनिक अधिकारी किसी तरह से पंगु बना हुआ है। साथ ही यहां मिलीभगत का कितना बड़ा खेल चल रहा है।

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आखिर क्यूं पहाडों के इस स्वरूप को बिगाडा है जा रहा
दरअसल माउंट आबू में सीवरेज लाइन का कार्य पिछले कई सालों से चल रहा है। पहले तो सीवरेज कम्पनी के ठेकेदारों ने माउंट आबू की सडकों को तोड तोड हर बदहाल कर दी है। अब ठेकेदार पहाडों को तोडने पर आमदा है । पहाडों को ब्लास्टिंग और ड्रील कर तोडा जा रहा है। जबकि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट की पहाडों के खनन और ब्लास्टिंग की पूर्णतय माउंट आबू में रोक है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा माउंट आबू में ब्लास्टिंग की दी गई अनुमति के पीछे की कहानी क्या है, फिलहाल यह जांच का विषय है। अब देखना होगा 300 करोड के इस प्रोजेक्ट में सरकार अपना क्या रूख अपनाती है। इधर नियमों को परिवर्तन कर प्रकृति के सौन्दर्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए बीच का रास्ता निकालना भ्रष्टाचार और मिलीभगत जैसे कई सवालों को जन्म दे रहे हैं।

रिपोर्ट- महेन्द्र वाघेला

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